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अक्षय तृतीया साल का सबसे शुभ दिन, क्या करें क्या न करें

Akshaya Tritiya is the most auspicious day of the year, what to do and what not to do
हर काम पूरा हो,
कोई सपना न अधूरा हो,
धन-धान्य और प्रेम से भरा हो जीवन,
घर में हो लक्ष्मी का आगमन,
अक्षय तृतीया की अनेकानेक बधाई

अक्षय का मतलब होता है, जिसका क्षय न हो। जो सार्वभौम हो, जो सदा के लिए हो। अक्षय तीज की गिनती युगादि तिथियों में होती है, ऐसा भविष्य पुराण कहता है। भगवान विष्णु को समर्पित अक्षय तृतीया वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष को मनाया जाता है। हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी या घर, भूखंड, वाहन आदि की खरीददारी से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं।

कामयाबी कदम चूमती रहे,
खुशियां आस-पास घूमती रहें,
धन की हो भरमार, मिले अपनों का प्यार,
ऐसा हो आपके लिए अक्षय तृतीया का त्योहार

कोरोना वायरस के कारण लाकडाउन के कारण देशभर में लोग घरों में रहने के लिए मजबूर हैं। इस कारण देशभर में मंदिर भी प्रवेश प्रतिबंधित है। ऐसे में सभी को घर में रहकर ही विष्णु भगवान की अराधना करनी चाहिए। वैसी भी कहा जाता है कि भगवान तो भाव के भूखें हैं। पंचांग के अऩुसार अक्षय तृतीया बहुत ही शुभ दिन है। कहा जाता है कि इस दिन दिन कमाया गया पुण्य अक्षय रहता है। वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है।मान्यता है सोशल मीडिया के इस दौर में लोग अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों को फेसबुक एवं वाट्सएप से बधाई दे रहे है।

दिनों दिन बढ़ता जाए आपका कारोबार,
परिवार में बना रहे स्नेह और प्यार,
होती रहे सदा आप पर धन की बौछार,
ऐसा हो आपका अक्षय तृतीया का त्यौहार

क्या करें-  पुराणों के अनुसार अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु के सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। सुबह सवेरे स्नान  करने के बाद भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान  कराना चाहिए। इसके बाद भगवान को जौ, सत्तू या फिर चने की दाल जो घर पर हो अर्पित कर पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। अक्षया तृतीया को पितरों की शांति के लिए बहुत विशेष माना जाता है। इस दिन पितरों की शांति के लिए भी गरीबों को दान किया जाता है। कहते हैं जो व्यक्ति इस दिन दान करता है। उसे अक्षय लाभ मिलता है।

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