30.1 C
New Delhi
August 20, 2019
simna
Breaking News Others Sufism & Bhaktiwad

अलैदा इस्लाम की खूबसूरती, अल्लाह, मोहम्मद और उनकी आल

दुनिया में जितने भी धर्म है उन सब में ईश्वर को अंगीकृत रूप में पूजा जाता है। चाहे बात ईसाई धर्म के पैरोकर ईसा मसीह की हो, हिंदू धर्म के भगवान राम, कृष्ण और शिव की हो, या फिर बौद्ध धर्म के गौतम बुद्ध की।  इन सभी धर्मों में ईश्वर अंगीकार रूप में साक्षात मूरत के रूप में दिखाई देते है।  जिनकी हिंदू, बौद्ध और ईसाई धर्म के लोग पूजा करते है। उनपर अपना विश्वास रखते है। उनसे अपनी परेशानी बताते है और समाधान के लिए हाथ फैला कर उनके आगे गिड़गिड़ाते है। लेकिन मुस्लिम धर्म मात्र ऐसा धर्म है जो ईश्वर के किसी रूप की पूजा नहीं करता। उन्हें मिट्टी से मूरत का रूप दें नमाज अदा नहीं करता। शायद यहीं एक चीज़ है जो इस्लाम को इन सब धर्मों से जुदा करती है। इस्लाम में खुदा की मौजूदगी पर विश्वास हर मुस्लिम को है लेकिन उसे मूरत में तब्दील कर उसे खुदा मानना या बुतों के आगे गिड़गिड़ाना इस्लाम में नहीं है।

एक मुस्लमान अपने रब को देखें बिना ही उसकी इबादत करता है। उससे गुनाहों की माफी मांगता है। अपनी ज़रूरतों के लिए गिड़गिड़ाता है। और कुछ भी गलत करने से पहले दिल में खुदा का खौफ़ रखता है।  अपनी तमाम ज़रूरतों के लिए हाथ उठा कर उससे फरियाद करता है। इस्लाम की खूबसूरती का दूसरा हिस्सा खुदा के पैगम्बर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उनकी आल है l खुदा के रसूल को देखें बिना उनसे मोहब्बत करना और उनके सुन्नतों पर अमल करना है। आज इस्लाम को समझने वाला हर शख्स खुद आले रसूल कहता है। इस्लाम की बुनियाद खुदा और उसका रसूल दोनों अनदेखें है बावजूद इसके हर ईमान वाले को उनका अहसास है। अपने खुदा और रसूल से मिलने की एक चाह के लिए ही हर मुस्लमान अपनी पूरी ज़िदंगी इबादत में गुज़ार देता है और यहीं बात इस्लाम को बेहद खूबसूरत और पाकीज़ा बनाती है।
गुलफशा अंसारी

Related posts

बिहार विधानसभा में नीतिश मोदी फिर होगें साथ-साथ, गठबंधन रहेगा बरकरार

admin

शक्तिशाली शासन और देश की दूसरी दूसरी ऐतिहासिक लड़ाई

admin

नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन से मार लो बाजी

admin

Leave a Comment