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जड़ी बूटियों पर हुआ बड़ा खुलासा, सेवन से पहले सावधान

Big disclosure on herbs, careful before intake

कोरोना वायरस से जहां पूरी दुनिया संक्रमण को फैलने से रोकने की तमाम कोशिशें कर रही है। लेकिन अभी तक रिजल्ड नहीं आ,या है। हालाकि पूरी दुनिया में इससे संक्रमितों की संख्या 24 लाख के पार पहुंच चुकी है। और मरने वाली की संख्या 16 लाख के पार पहुंच चुका है। जिससे पूरी दुनिया में तबाही मची हुुई है।

एक तरफ पूरी दुनिया में इससे संक्रमण को रोकने की कोशिश कर रही हैं। तो वहीं दूसरी तरफ समाचार चैनलों और सोशल मीडिया पर ग़लत और गुमराह करने वाली सूचनाएं फैलाई जा रही हैं। यहां हम इससे जुड़े कुछ प्रमुख उदाहरणों की चर्चा करेंगे।

भारत में फैली अफवाह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की..

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ने का एक नुस्खा बताया था जिसमें देशवासियों को पारंपरिक जड़ी-बूटी इस्तेमाल करने की भी सलाह दी थी। प्रधानमंत्री ने संबोधन में कहा है कि लोगों को काढ़ा बनाने के लिए आधिकारिक दिशा-निर्देश का पालन करना चाहिए। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएगा। जिसका सोशल मीडिया ने बिना इसकी जांच किए इसे उछाला गया। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बात के कोई प्रमाण नहीं है कि इस तरीक़े से वायरस के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।

यह भी पढ़ें- COVID-19 से बचने के लिए अफवाहों पर ना दें ध्यान, डॉक्टर्स की सलाह जरूरी

भारत का आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (आयुष) मंत्रालय पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को बढ़ावा देता है और रोग-प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने को लेकर कई तरह के दावे करता है। इनमें से कई उपायों को मंत्रालय की तरफ़ से ख़ासतौर पर कोरोना वायरस को रोकने के लिए प्रचारित किया गया है। जबकि इनके पुष्टि वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। भारत सरकार की अपनी फ़ैक्ट-चेकिंग टीम ने इस तरह के दावों को ख़ारिज कर दिया है। बस गर्म पानी पीने और सिरका और नमक के घोल से गरारा करने जैसे उपाय शामिल हैं।

भारत के वैज्ञानिक के आलावा  अमेरिका के येल यूनिवर्सिटी की इम्युनोलॉजिस्ट अकिको इवासाकी ने  भी इस समस्या को निपटने  इस तरह के कई दावों (जिसमें रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने का दावा किया जाता है) का कोई प्रमाणिक आधार नहीं बताया

 क्या सच में एक कप चाय वायरस का इलाज

भारत के अलावा चीन का भी एक दावा बहुत ही तेजी से फैल रहा है। जिसमें सोशल मीडिया पर चीन के डॉक्टर ली वेनलियांग के हवाले से झूठा दावा फैलाया जा रहा है। यह वही डॉक्टर हैं जिन्होंने पहली बार वुहान में इस वायरस के बारे में बताया था और बाद में जिनकी संक्रमण से मौत हो गई थी। यह दावा किया गया कि डॉक्टर ली ने चाय में पाए जाने वाले मिथाइलक्सान्थाइन को लेकर यह प्रमाण पेश किया था कि इससे कोरोना वायरस का असर कम होता है। चीन के अस्पतालों में कोरोना के मरीज़ों को दिन में तीन बार चाय दी जा रही थी।

सूत्रों के अनुसार चाय में मिथाइलक्सान्थाइन पाया जाता है। यह कॉफ़ी और चॉकलेट में भी पाया जाता है।

लेकिन इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि डॉक्टर ली वेनलियांग इसके कोरोना पर असर को लेकर कोई शोध कर रहे थे। सच तो यह है कि वो आंख के डॉक्टर थे ना कि कोई वायरस पर काम करने वाले विशेषज्ञ और ना ही चीन में कोरोना के मरीज़ों को अस्पताल में चाय पिलाकर उनका इलाज किया जा रहा था.

 

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