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2020 साल का पहला सूर्य ग्रहण, देखें ‘रिंग ऑफ फायर’ का खूबसूरत नजारा

First solar eclipse of 2020, see the beautiful sight of 'Ring of Fire'

21 जून 2020 यानि आज साल का पहला सूर्यग्रहण लग रहा है। इस सूर्य ग्रहण में आप साफ देख सकते है कि चंद्रमा पृश्वी और सूर्य के बीच आता है।जो  सूर्य के मध्य भाग को पूरी तरह से ढक लेता है। इस घटना को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। ये नजारा  बहुत कही कम देखने को मिलता है । सूर्य एक चमकती अंगूठी की तरह दिखेगा। ये न तो आंशिक ग्रहण होगा और न ही पूर्ण। यह ग्रहण उत्तर भारत में दिखाई देगा। जिसमें राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, कुरूक्षेत्र, चमौली, सिरसा, सूरतगढ़ में भी इसे देखा जा सकेगा। अब अगला सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर 2022 को लगेगा।

 

दिल्ली में बादलों के बीच सूर्य ग्रहण का नजारा कुछ ऐसे दिख रहा है।

अमृतसर में ऐसा दिख रहा है सूर्य ग्रहण:

 

और देखें दिल्ली में सूर्य ग्रहण की तस्वीरें:

साल का पहला सूर्य ग्रहण, जाने सारी जरूरी बातें

 

साल के सबसे बड़े दिन पर ये ग्रहण लगने जा रहा है। जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में आता है और सूर्य के मध्य भाग को पूरी तरह से ढक लेता है। इस घटना को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। इसके परिणामस्वरूप सूर्य का घेरा एक चमकती अंगूठी की तरह दिखाई देता है। ग्रहण के कारण सूतक लग गए है। ये भारत समेत यूरोप में के कई देशों जैसे चीन, अफ्रीका, कांगो, इथोपिया, नेपाल, पाकिस्तान आदि देशों में दिखाई देगा।

धार्मिक मान्यताएं

इस सूर्यग्रहण में चंद्रमा की छाया सूर्य का 99 फीसदी भाग ढकेगी। ऐसे में सूर्य के किनारे वाला हिस्सा प्रकाशित रहेगा और बीच का हिस्सा पूरी तरह से चांद की छाया से ढक जाएगा। इस ग्रहण को बिहार समेत देश व दुनिया के विभिन्न हिस्सों में देखा जायेगा। इस ग्रहण को ज्योतिष शास्त्र में काफी महत्व दिया जा रहा है।
ज्योतिषाचार्य प्रियेंदू प्रियदर्शी ने पंचांगों के आधार पर बताया कि इस सूर्य ग्रहण के समय ग्रह और नक्षत्रों का ऐसा संयोग बनने जा रहा है जो पिछले 500 सालों में नहीं बना। ग्रहण मृगशिरा, आद्र्रा नक्षत्र और मिथुन राशि में लगेगा

सूर्य ग्रहण प्राकृतिक आपदाओं का कारक

गर्भवती रखें सावधानी : भारतीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण शुरू होने से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक यानी ग्रहणकाल में गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। घर के बुजुर्गों की सलाह के अनुसार ही जरूरी उपाय अपनाएं। इसके अलावा भगवान का स्मरण करें।

ग्रहण के दौरान कई ग्रहों की वक्री स्थिति सूर्य ग्रहण को बहुत ही अधिक प्रभावशाली बनाएगी। ज्योतिष अनुसार ग्रहण प्राकृतिक आपदाओं का कारक बन सकता है। ये ग्रहण भारत में दिखाई देने वाला है इसलिए इसका सूतक भी मान्य होगा। सूतक काल की शुरुआत शनिवार की रात 10.17 बजे से हो गयी है।

छह ग्रह रहेंगे वक्री

ज्योतिषाचार्य पीके युग के मुताबिक सूर्यग्रहण के समय एक साथ छह ग्रह वक्री यानी उल्टी चाल चल रहे होंगे। बुध, गुरु, शुक्रशनि, राहू व केतु वक्री रहेंगे। यह ग्रहण आर्थिक मंदी की ओर इशारा कर रहा है। वहीं ग्रहण के समय मंगल जलतत्व की राशि में बैठकर सूर्य, बुध, चंद्रमा और राहू पर दृष्टि कर रहा है। यह सब भारी बारिश की ओर संकेत दे रहा है।

वृहतसंहिता के हवाले से कहा कि एक माह में दो से अधिक ग्रहण लगने से आमजन को कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। ज्योतिषाचार्य डॉ. राजनाथ झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि आषाढ़ कृष्ण अमावस्या रविवार को खंडग्रास कंकण सूर्यग्रहण लगेगा। रविवार के कारण यह चूड़ामणि योग में लग रहा है। मिथिला विवि. पंचांग के हिसाब से बिहार में रविवार को सुबह 10.27 बजे से दोपहर 1.52 बजे तक इसे देखा जा सकेगा।

ग्रहण से हुई सारी मुश्किलें धीरे- धीरे अनुकूल होगीं

परिस्थितियां धीरे-धीरे अनुकूल होंगी ज्योतिषाचार्य डॉ. झा के मुताबिक गत वर्ष 26 दिसंबर को सूर्यग्रहण था। छह मास बाद दूसरा सूर्यग्रहण है। इस दौरान ग्रह गोचरों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती है। इससे कई तरह की आपदाएं, महामारी, जनमानस में असौहार्द्र, शत्रु उपद्रव जबकि राहू से साजिशें, बीमारियों से देश अस्त-व्यस्त रहा है। इस सूर्यग्रहण के बाद इन चीजों में कमी आएगी। यह ग्रहण मिथुन राशि में लगेगा, जबकि राहू भी मिथुन राशि में है। राहू मिथुन से 25 सिंतबर को निकलेगा। यानी इसके बाद परिस्थितियां अनुकूल होती जाएंगी।

 

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