Photo Gallery

खामोश अंधेरे में जगमगाते व्यक्तित्व की मिसाल बनी हेलेन

क्या हो जब आंखों में रोशनी की किरण न हो, कानों में सुनने की क्षमता न हो, होठों को बोलने की इज़ाजत न हो। हममें से कोई भी ऐसे जीवन की कल्पना तक नहीं करना चाहेगा। बावजूद इसके कई ऐसे लोग है जो इन समस्याओं से ग्रस्त है। कई लोग है जो दुनिया की खूबसूरती को देख नहीं सकते, प्राकृतिक की सुरीली आवाज़ों के प्रति खुद को आत्मसात नहीं कर सकते। बहुत से ऐसे लोग है जो बोलने, सुनने और देखने की कुदरती नेअ़मतों से लाचार होते है। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि इन तमाम कमियों के बाद उनकी काबिलियत,  कुछ कर गुज़रने का ज़ज्बा और दृढ़ इच्छा शक्ति हमसे कई गुणा प्रबल होती है। 
 
दुनिया में ऐसे कई लोग है जो तमाम कमियों के बाद दुनिया के लिए मिसाल बनें और यह साबित किया कि इच्छा शक्ति से बढ़कर कुछ नहीं 27 जून, 1880 को अमेरिका के अलाबामा प्रांत में जन्मी  हेलेन एडम्स केलर  भी एक ऐसा ही नाम है जो समाज के लिए मिसाल बनीं।आंखों से दृष्टिहीन, कानों से बाधिर और होठों से लाचार होने के बावजूद हेलेन केलर दुनिया की पहली बेचलर डिग्री प्राप्त करने वाली मूकबाधिर लेडी बनीं। हेलन शुरू से ऐसी नहीं थी, वह भी आम बच्चों की तरह अपने माता-पिता को देख सकती थी, उनकी आवाज़ को सुन प्रसन्न होती थी, रोती थी हंसती थी लेकिन 19 महीने की आयु में उन्हें गंभीर बुखार ने अपनी चपेट में ले लिया। जिसके बाद हेलन की ज़िदगी से दुनिया के खूबसूरत रंग औझल होने लगे।  इस बीमारी के चलते उनकी देखने-सुनने की शक्ति हमेशा के लिए जाती रही और वह सुनने, बोलने और देखने के लिए लाचार हो गई।
 
माता-पिता को नन्हीं हेलेन की इस दशा के लिए बहुत अफसोस था पर उन्होने हिम्मत नहीं हारी और हेलेन को पढ़ाने और योग्य बनाने के लिए अथक प्रयास किए इसी दौरान हेलेन की ज़िदंगी में सबसे पहली दस्तक दुनिया को टेलीफोन का तोहफा देने वाले विश्व प्रख्यात साइंटिस्ट एलेक्जैंडर ग्राहम बेल से हुई। ग्राहम बेल ने ही केलर दंपत्ति को बॉटसन शहर के एक स्कूल के बारे में बताया, जहां इस तरह के बच्चों को पढ़ाया जाता था। जब हेलन के माता-पिता वहां पहुंचे तो उस स्कूल के डायरेक्टर ने हेलन के लिए एक प्रशिक्षक उपलब्ध करवाने का वादा किया। कुछ महीनों बाद एनी सुलिवान हेलन की प्रशिक्षिका बन उनके घर पहुंचीं यह हेलेन की ज़िंदगी में दस्तक देने वाली और उन्हें संभालने वाली शिक्षिका एनी मैंसफील्ड थी। इस बारे में हेलन लिखती हैं (द स्टोरी ऑफ माई लाइफ), ‘वह मेरी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण दिन था जब मेरी शिक्षिका एनी मैंसफील्ड सुलिवान मेरे पास आयी थीं।’
 
एनी ने हेलन के हाथ पर सांकेतिक भाषा से आस-पास की चीजों से हेलन की पहचान करवाना शुरू किया। दिमाग से तेज़ हेलन सांकेतिक भाषाओं की बनावट को याद कर लेती पर उनके अर्थ को समझ पाने में असफल थी। एनी एक दिन हेलन को मग और वॉटर के संकेत सिखा रही थीं। लेकिन हेलन बार-बार दोनों के बीच भ्रमित हो रही थीं, यह खीज उनके भीतर ऐसी बढ़ी कि उन्होंने अपनी गुड़िया और कमरे का दूसरा सामान तोड़ दिया। हेलेन के व्यवहार से नाराज एनी उन्हें कमरे से बाहर ले आयीं और एक हैडपंप से पानी निकाल कर उनके हाथ पर डाल दिया और वॉ-ट-र का संकेत बनाया। यही वो पल था जब हेलन समझ गई कि वे सारे संकेत जो एनी उनके हाथ पर बनाती थीं, वे असल में अलग-अलग चीजों के नाम थे। वह लिखती है  “मैं भाषा के रहस्य को समझ गयी थी. पानी का मतलब एक ऐसी अद्भुत चीज थी जो ठंडी थी और मेरे हाथों पर बह रही थी. इस एक शब्द ने मानो मेरी आत्मा को जगा दिया, मुझे रोशनी और उम्मीद के साथ तमाम खुशियां इसी पल में मिल गयी थीं”
 
11 साल के होते-होते हेलन ने पढ़ना और बोलना सीख चुकी थी।1903 में अपनी टीचर एनी के बहुत कहने पर उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी। जिसके बाद उनका आत्मविश्वास प्रबल हुआ। पूरी जिंदगी में हेलन ने 12 किताबों के अलावा कई आलेख लिखे जो दुनियाभर में काफी सराहे गए। कॉलेज पूरा होते-होते हेलन समाजवादी विचारधारा वाली एक पार्टी की सदस्य बन गईं। कॉलेज के बाद 1913 में हेलन का चयन बतौर प्राध्यापिका हो चुका था। वे दुनियाभर के उन तमाम लोगों के लिए कुछ करना चाहती थीं जो आंखों से देख पाने में असमर्थ थे। वे उन सबके लिए कुछ करना चाहती थी।  1915 में हेलन ने अपने साथियों के साथ मिलकर ‘हेलन केलर अंतरराष्ट्रीय संगठन’ की स्थापना की, जो दृष्टि, स्वास्थ्य एवं पोषण से संबंधित अनुसंधानों को समर्पित था। इसके बाद हेलन ने 1924 में दृष्टिहीनों के हितों के लिए बनी संस्था ‘अमेरिकन फाउंडेशन फॉर द ब्लाइंड्स’ के लिए काम करना शुरू किया. इसके अलावा वे और भी कई संस्थाओं से जुड़ी जो दृष्टिहीनों के कल्याण के लिए काम करती थी। इसके लिए हेलन ने दुनियाभर में दौरे किए। इस दौरान वे तकरीबन 35 देशों में गईं। द्वितीय विश्वयुद्ध में भी हेलन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अमेरिका की ओर से उन्हे सद्भावना दूत बनाकर जापान भेजा गया।  
1909 से लेकर 1921 तक हेलन ने समाजवाद और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर कई लेख लिखे जिन्हें बाद में ‘आउट ऑफ द डार्क’ नाम से प्रकाशित किया गया। लेकिन उनके इस कदम पर अमेरिका के कई पूंजीवाद समर्थकों को घोर आपत्ति हुई। इन सबसे परे उन्होंने अपना काम नहीं छोड़ा। वे अक्सर कहा करती थीं, ‘आंखें होते हुए भी न देख पाना दृष्टिहीन होने से कहीं ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण है।’ समस्त मानव समुदाय के लिए हेलन के उत्कृष्ट योगदानों को ध्यान में रखते हुए 14 सितंबर 1964 को अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन ने उन्हें मैडल ऑफ फ्रीडम से नवाज़ा था जो अमेरिका के सर्वोच्च सम्मानों में से एक है।
 
हेलन ने सिर्फ आपाहिजों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनीं बल्कि अमेरिकी राजनीतिज्ञ एलेनर रूजवेल्ट, अभिनेता विल रोजर, महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंसटीन, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी, व्यवसायी एंड्रयू कार्नेगी, महान कलाकार चार्ली चैपलिन, व्यवसायी हेनरी फोर्ड जैसे नाम शामिल थे। भारत की बात की जाए तो रबीन्द्रनाथ टैगोर और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी हेलन के मुरीद थे। दुनिया का महान से महान व्यक्तित्व भी हेलेने के मनोबल के आगे बौना प्रतीत होता है। इसलिए हम तो इन्हें संपूर्ण समाज की प्रेरणा आदम्य साहस की मूरत ही कहेंगे। 

Related posts

सलमान से लेकर परवीन बॉबी तक के वो सितारे जिन्होने अभी तक नहीं रचाई शादी

admin

टिकटॉक की दुनिया की पांच रंगीन अदाकारा

admin

अगर आपको हॉरर मूवी देखना पसंंद है तो देखिए टॉप मॉस्ट हॉरर मूवी

admin

Leave a Comment

UA-148470943-1