Religious Sufism

ईद मिलादुन्नबी( صلی اللہ تعالیٰ علیہ و آلہ و سلم ) कैसे मनाए ?

रबी-उल-अव्वल का महीना शुरू हो चुका है, मुसलमान इस महीने की 12 तारीख को ईद मिलादुन्नबी (صلی اللہ تعالیٰ علیہ و آلہ و سلم) मनाते हैं, इस दिन हमारे नबी (صلی اللہ تعالیٰ علیہ و آلہ و سلم) इस दुनिया में तशरीफ लाए।

इस दिन को मनाने के लिए बहुत से अच्छे तरीके हैं, जिन में से कुछ ये हैं :

  • इस महीने की पहली तारीख से लेकर 12 तक आक़ा (صلی اللہ تعالیٰ علیہ و آلہ و سلم) की सीरत (ज़िन्दगी के हालात) पर प्रोग्राम करवाईए ताकि हमें खासकर हमारे बच्चों को पता चले कि हमारे नबी (صلی اللہ تعالیٰ علیہ و آلہ و سلم) कितने अच्छे हैं और हम से कितना प्यार करते हैं।
  • अपने आक़ा(صلی اللہ علیہ و آلہ و سلم) की शान के बारे में और आपकी सीरत पर मुफ्त किताबें बाँटिए और आप इस्लाम के बारे में सहीह किताबें भी बाँट सकते हैं। 
  • न सिर्फ इस दिन बल्कि पूरे महीने खास तरीक़े से गरीबों, यतीमों और बेवाओं की मदद कीजिए। हो सके तो लोगों से छुप कर मदद कीजिए।
  • हर साल इस मौके पर अपने माँ-बाप, रिश्तेदारों, दोस्तों और जान पहचान वालों से दिल की गहराईयों से माफी मांगिए, इस अदा से माफी मांगिए की वह माफ ही कर दें और तब तक माफी मांगते रहीए जब तक वह माफ नहीं करदें, जो लोग नाराज़ हैं उन को भी मनाईए। 
  • अपने गुनाहों से अल्लाह ताला की बारगाह में शर्मिंदगी के साथ गिड़गिड़ा कर और रो-रो कर तोबा कीजिए और बाद में गुनाह न करने का पक्का इरादा कीजिए, यह काम खास कर बारहवीं रात को कीजिए।
  •  दोस्तों और रिश्तेदारों की दावत कीजिए और उन को तोहफे दीजिए, इस से मोहब्बत बढे़गी और दूरियाँ खत्म होंगी। 
  • इस दिन पानी और शर्बत की सबीलें लगाईए और अपने आक़ा (صلی اللہ تعالیٰ علیہ و آلہ و سلم) को खुश कीजिए।
  • अपनी – अपनी हैसियत के मुताबिक अच्छे-अच्छे पकवान बनाईए और उन पर फातिहा लगाईए, सब के साथ खास तरीके से अपने आक़ा व मौला (صلی اللہ تعالیٰ علیہ و آلہ و سلم) को सवाब पहुंचाईए और बहुत अदब के साथ बच्चों, पड़ोसियों, घर वालों और जहाँ तक हो सके लोगों को बांटिए, मगर अच्छी तरह याद रहे कि एक दाने की बराबर भी ज़मीन पर नहीं गिरे। 
  • इस दिन को मनाने के लिए अपने घरों, दुकानों, मोहल्लों, मस्जिदों, मदरसों, स्कूलों और जहां-जहां हो सके खूब सजावट कीजिए।
  • जगह – जगह ऊंचाई पर हरे झंडे लगाईए, चौक और चौराहों पर हो सके तो बड़े और ज़्यादा ऊंचे झंडे लगाईए।
  • इस महीने के गुज़रने के बाद झंडों और सजावट के सामान को संभाल कर रख दीजिए ताकि जब आप अगली बार सजावट करें तो ऐसा लगे की हुज़ूर (صلی اللہ تعالیٰ علیہ و آلہ و سلم ) की आमद के जश्न का मोसम आ गया है, अगर पूरे साल सजावट रहे और झंडे लगे रहें तो पता कैसे लगेगा कि हम इस महीने में जश्न मनाने वाले हैं।
  • खबरदार! खबरदार! खबरदार!    हर घड़ी अदब और एहतिराम का खूब ध्यान रखिएगा।

 आपका अपना

 नौमान असलम क़ादरी,

क़ादरी दारु-ल- इफता,
 सम्भल शहर, यू. पी., इंडिया

📞 +91-9634855245.

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