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August 20, 2019
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इमरान सरकार को नहीं पाक आवाम को पड़ेगा फर्क

Simna News
-डॉ. हिदायत अहमद खान-
पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी, सफल कप्तान से राजनेता बने इमरान खान जैसे शख्स ने प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली तो लोगों को उम्मीद बंधी थी कि अब देश के हालात बदलेंगे और पड़ोसी मुल्कों से ताल्लुकात भी सुधरेंगे। दरअसल एक अच्छे खिलाड़ी में जो टीम भावना सभी को साथ लेकर चलने वाली होती है और ईमानदारी का तो वो खुद भी कायल होता है, उसके आधार पर ही इमरान से बतौर प्रधानमंत्री व्यवहार किए जाने की दरकार रही है। प्रारंभिक काल में प्रधानमंत्री इमरान ने भ्रष्टाचार, घपले-घोटाले और काली कमाई करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाही करने वाले जो बयान दिए और जिस तरह से फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की बात करते हुए कुछ कदम उठाए उससे यही संदेश गया था कि अब पाकिस्तान सरकार की तरफ से जो भी कार्य किया जाएगा वह लीक से हटकर होगा और देशहित में किया जाएगा। इसलिए विपक्ष द्वारा लगाए गए चुनाव में धांधली जैसे गंभीर आरोपों को भी दरकिनार करते हुए पाकिस्तानी आवाम ने इमरान का बतौर प्रधानमंत्री इस्तकबाल किया। इससे हुआ कुछ नहीं क्योंकि इमरान सरकार को तो बतौर तोहफे में खाली खजाना मिला और सेना व कट्टरपंथियों की दखलंदाजी ने उन्हें ईमानदारी से चार कदम भी चलने नहीं दिया। इससे यह बात भी सच हो गई कि इमरान तो सेना और कट्टरपंथियों के लिए मुखौटा सरकार का काम कर रहे हैं, जबकि असल काम तो उन लोगों का है जिन्होंने देश और दुनिया में आतंक के जरिए कोहराम मचा रखा है। यही वजह है कि भारत समेत अन्य पड़ोसी मुल्कों में आतंकवादी हमले हो रहे हैं और पाकिस्तान में मौजूद उनके आका हमलों की जिम्मेदारी ले रहे हैं। इसका खामियाजा भले ही इमरान सरकार को भुगतना नहीं पड़ रहा हो, लेकिन पाकिस्तानी आवाम के लिए तो इसे बेहतर भविष्य देने वाला कदम नहीं कहा जा सकता है। दरअसल पुलवामा हमले के बाद भारत ही नहीं बल्कि अन्य पड़ोसी देशों समेत अनेक शांतिप्रिय देशों ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादियों को सबक सिखाए जाने की मांग करते हुए पाबंदियां लगाए जाने की भी बात कही है। इसी सिलसिले में भारत सरकार ने जहां सेना को खुली छूट देने की बात कही वहीं सरकार के नुमाइंदे यह कहते हुए भी नजर आए कि भारत से निकलकर पाकिस्तान की ओर जाने वाली तीन नदियों के पानी को रोका जाएगा, ताकि पाकिस्तान उस पानी का इस्तेमाल नहीं कर सके।
 गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में कहा था कि सिंधु जल समझौते के तहत आने वाली रावी, ब्यास और सतलुज का पानी डायवर्ट कर यमुना में लाया जाएगा। इसके साथ ही जो पानी अब तक पाकिस्तान की जमीन को तर करता आया है वह भविष्य में वहां नहीं पहुंच सकेगा। इससे पाकिस्तान की जनता को खासी दिक्कत होगी। इन तीन नदियों के पानी की दिशा को बदलने से जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों में सिंचाई के लिए भी पर्याप्त पानी मिलने की बात कही जा रही है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान जल संसाधन मंत्रालय के सचिव ख्वाजा शुमैल कह रहे हैं कि भारत के इस कदम से पाकिस्तान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दरअसल उन्होंने यहां सिंधु समझौते के तहत इन नदियों का अधिकार भारत के पास होने की बात कहकर अपनी असफलता को सही बतलाने जैसा काम कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यही है कि इन नदियों के पानी को रोके जाने से पाकिस्तानी आवाम को खासी परेशानी होगी। पीने के पानी से लेकर सिंचाई के पानी तक की किल्लत इन नदियों के तराई वाले क्षेत्रों में होगी। वैसे भी पाकिस्तान में आतंकवादियों को लेकर अमेरिका पहले से ही पाबंदी लगाए हुए है, उस पर अब पड़ोसी मुल्कों से संबंध खराब करके पाक आवाम की मुश्किलें बढ़ाने का काम आतंकवादियों के आकाओं ने कर रखी है। इसे संज्ञान में लेते हुए पाकिस्तान की इमरान सरकार को चाहिए था कि वह जितनी जल्दी हो सके इन आतंकवादियों के ठिकानों को खत्म करने और भारत से भागे अपराधियों को बिना शर्त सौंपने का काम करती। इससे न सिर्फ पड़ोसी देशों से उसके संबंध सुधरते, बल्कि जो आर्थिक पाबंदियां अमेरिका ने उस पर लगा रखी हैं उसमें भी शिथिलता बरती जा सकती थी। इसलिए लगातार कहा जा रहा है कि आतंकवाद के खात्में की खातिर पाकिस्तान सरकार को खुद आगे आकर कार्रवाई करनी चाहिए और भविष्य में पाक आवाम के लिए जो मुसीबतें खड़ी हो रही हैं, उससे उन्हें छुटकारा दिलाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। यहां यह नहीं भूलना चाहिए कि सरकारें तो आती-जाती रहती हैं, लेकिन आवाम को तो पूरी जिंदगी वहीं रहना है। इसलिए फैसले लेते वक्त देश और आवाम की भलाई को आगे किया जाना चाहिए।

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