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कमलेश तिवारी हत्याकांड के पांच दिनों बाद आरोपी गिरफ्तार, बयान का था मर्डर से संबंध

Kamlesh Tiwari accused arrested after five days of murder, statement had relation to murder

लखनऊ || मुख्यमंत्री योगी आदित्य के राज में हिंदूवादी नेता और हिन्दू महासभा के पूर्व अध्यक्ष की हत्या की गुत्थी को गुजरात आतंकी रोधी दस्ते (एटीएस) ने सुलझा ली है। हत्याकांड के पांच दिनों बाद आखिरकार हत्याकांड के मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। गुजरात एटीएस ने दो आरोपी अशफाक शेख और मोइनुद्दीन पठान को गुजरात बॉर्डर से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि कमलेश तिवारी की हत्या साजिश गुजरात के सूरत में रची गई थी और इसे अंजाम यूपी की राजधानी लखनऊ में दिया गया। साथ ही हत्या की वजह का भी खुलासा हो चुका है।  गिरफ्तारी के बाद से ही पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर इस हत्याकांड में अन्य की मौजूदगी की भी तफ्तीश कर रही है। इसके लिए बरेली के आला हज़रत के मोहम्मद कैफ को भी पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया गया है। 

विवादास्पद बयान के बाद से ही साजिश पर जारी था काम

गिरफ्तारी के बाद शुरुआती पूछताछ में आरोपी अशफाक शेख और मोइनुद्दीन पठान ने कबूल किया कि उन्होनें कमलेश तिवारी के भड़काऊ बयान का बदला लेने के लिए उनकी हत्या की थी। जिसके लिए वह बीते चार साल से इसकी योजना बना रहे थे। चौंकाने वाली बात यह है कि पकड़े गए मुख्य आरोपियों में से अशफाक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव है, तफ्तीश में जुटे अधिकारी भी यह जानकर सकते में हैं। जांच में सामने आया कि सूरत के ग्रीन व्यू अपार्टमेंट में कमलेश तिवारी की हत्या की साजिश रची गई। ग्रीन व्यू के 108 नंबर फ्लैट में मोइनुद्दीन पठान रहता था और 303 नंबर का जो मकान है वो अशफाक का है। हत्या की साजिश में शामिल फैजान, रशीद और मोहसिन को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। उन्होनें बताया कि कमलेश तिवारी की भड़काऊ भाषण से वो बुरी तरह आहत हुए थे जिसके बाद से ही वे उनकी हत्या करना चाहते थे।

सरेंडर करना चाहते थे आरोपी, पैसों की किल्लत बनी गिरफ्तारी की वजह

हत्याकांज के मुख्य आरोपी अशफाक शेख 34 और मोइनुद्दीन पठान 27 साल का है। गुजरात आतंक रोधी दस्ते (एटीएस) के अनुसार गुजरात-राजस्थान सीमा पर शामलाजी के पास से उन्हें तब गिरफ्तार किया गया, जब वे गुजरात में घुसने वाले थे। जानकारी के अनुसार पैसों की किल्लत होने पर आरोपियों ने लोगों से संपर्क साधने की कोशिश की जिसके बाद पुलिस अधिकारी ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए उनकी स्थिति का पता लगाया। एक अन्य जानकारी के अनुसार गिरफ्तारी से ठीक एक दिन पहले आरोपियों ने लखनऊ के एक वकील को फोन कर अपनी पहचान बताते हुए सरेंडर करने की इच्छा भी जाहिर की थी। 

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