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06/04/2020
Hinduism Religious

जानें छठ मैया की महिमा और छठ पूजा का शुभ मुहूर्त

Know the glory of Chhath Maiya and the auspicious time of Chhath Puja

पूर्वांचलियों के सबसे बड़े त्यौहार छठ की शुरुआत नहाए खाए के साथ ही शुरू हो जाती है। विशेष रूप से पूर्वांचल भारत में मनाए जाने वाले इस त्यौहार को अब देश-विदेश में मनाया जाने लगा है। देश की राजधानी दिल्ली के कई इलाके भी इस त्यौहार से ओतप्रोत नज़र आते है। यह त्यौहार विशेष रुप से छठ मैया को समर्पित होता है। इस त्यौहार में कई कठोर अनुष्ठान और नियम शामिल होते हैं। इस व्रत में व्रती बिना पानी के 36 घंटे तक कठोर उपवास करते हैं। कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य षष्ठी के रूप में  मनाया जाने वाले छठ की शुरुआत नहाय खाय के साथ ही शुरू हो जाती है और सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ इस त्यौहार का समापन किया जाता है। छठ पूजा में भक्तजन सूर्य देव और उनकी बहन छठी मैया को छठ मां के नाम से भी प्रार्थना करते हैं। व्रत और पूजा परिवार और उनकी सलामती के लिए आशीर्वाद लेने के लिए की जाती है।

व्रत और कठिन अनुष्ठान के अलावा यह पर्व पवित्र प्रसाद तैयार करने के लिए, थेवा को पूजा करने के लिए डली / बावड़ी (टोकरी) सजाने के लिए जाना जाता है। इस पर्व से जुड़ी हर तरह की तैयारी इसे और अधिक खास बनाती है। सूर्य षष्ठी छठ पूजा का तीसरा दिन है जो कि 2 नवंबर, 2019 को है। इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन और प्रसाद और फलों को बांस की टोकरी में एक सुंदर रूप में सजाया जाता है। व्रती धूप लेने के लिए टोकरी, तालाब, नदी या घाट आदि पर जाते हैं। डूबते सूर्य की पूजा करने के लिए स्नान किया जाता है। छठ घाट की तरफ जाती हुए महिलाएं रास्ते में छठ मैय्या के गीत गाते हुए अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करती है। अंत में किसी घाट, तालाब, नदी और नहर में कमर तक डूब कर अर्घ्य दिया जाता है और सूर्य देव की पूजा की जाती है।

सूर्यास्त के बाद अगली सुबह जब सूर्य उदय होता है तो सुबह की अर्घ्य जल में जाकर अर्घ्य के साथ सौरी या सुपाली में अर्पित की जाती है। सुबह प्रसाद के बाद व्रती एक-दूसरे को प्रसाद वितरित करते हैं और घाट पर बड़ों से आशीर्वाद लेते हैं। इसके बाद वे घर वापस आ जाते हैं। घाट से लौटने के बाद, व्रती अदरक और पानी लेकर अपने 36 घंटे के लंबे उपवास को तोड़ते हैं। उसके बाद स्वादिष्ट भोजन तैयार किया जाता है और व्रती को खाने के लिए पेश किया जाता है। यह व्रत अधिकतर घर परिवार की मुखिया और माता के द्वारा किया जाता जो विशेष रूप से अपने परिवार की खुशहाली और स्वास्थ्य के लिए करती है। लोगों की आस्था है कि छठ मैया का व्रत करने से उनके सभी दुख दूर हो जाते है और उन्हें छठ मैया का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

 

छठ पूजा 2019 तिथि और मुहूर्त
  • छठ पूजा सूर्योदय सुबह 6:30 बजे
  • छठ पूजा सूर्यास्त शाम 5:30 बजे

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