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कोटा बना राजनीतिक का अखाड़ा, एक दूसरे पर तंज कसने का सिलसिला हुआ शुरु

Kota became political arena, started to tighten each other

कोरोना महामारी के बीच कई मजदूर से लेकर हजारों छात्र अपने घर से दूर कोटा में फसें हुए हैं। इस लॉकडाउन के बढ़ते मियाद की वजह से मजदूर और छात्र-छात्राओं अपने घर जाने की गुहार लगा रहे है। जिसको देखते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री ने हर राज्यों को छात्रों को घर जाने की अनुमति दे दी है। जिसके बाद यूपी सरकार की योगी सरकार ने छात्रों के लिए कई बसें यूपी से भेज दी।  युपी सरकार ने शुक्रवार को 252 बसें कोटा भेजी है। हालांकि 102 बसें झांसी और 150 बसें आगरा से रवाना हुई है।

गहलोत सरकार ने छात्रों को बुलाने की अनुमति दी

सोशल मीडिया पर छात्रों द्वारा चलाई गई मुहिम की वजह से यूपी सरकार ने 252 बसें कोटा भेंजी।  जिसके बाद ओर राज्य की छात्र छात्राएं भी घर पहुचाने की मांग उठने लगी। जिसको देखते हुए  राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने छात्रों को वहां से जाने को स्वीकृति देने को तैयार हो गई है। सीएम गहलोत ने कहा है कि कोटा में मौजूद छात्रों को संबंधित राज्य सरकार की सहमति पर उनके गृह राज्यों में भेजा जा सकता है। जैसा कि यूपी सरकार ने कोटा में रहने वाले छात्रों को वापस बुलाने के लिए कदम उठाए हैं अन्य राज्य की सरकारें भी अपने यहां के छात्रों को बुला सकती हैं।

योगी सरकार ने छात्रों के लिए भेजी बसें
यूपी सरकार द्वारा यूपी से भेजी गई 252 बसें शुक्रवार को झांसी और आगरा से रवाना हो गई थी। जिसकी खबर मिलते ही कोटा में फसें हजारों छात्र- छात्राएं बस स्टैंड पर एक साथ इक्ट्ठा हो गए। घर लौटने की अफरा-तफरी के बीच सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ गईं। छात्र जैसे-तैसे बस पर सवार होने लगे हैं। जिसको लेकर लॉकडाउन उल्लंघन एक अलग ही विवाद खड़ा हो गया है। जो राजनीतिक आखाड़े में एक दूसरे को तंज कसने से शुरु हुआ।
कोटा बनाम राजनीतिक अखाड़ा

भारत को इंजीनियर और डॉक्टर देने वाला राजस्थान का कोटा शहर अब राजनीति के अखाड़े में तब्दील हो गया है। बिहार और उत्तर प्रदेश से हजारों की संख्या में इंजीनियरिंग और मेडिकल की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने कोटा गए हजारों छात्र लॉकडाउन में वहीं अटक गए हैं। करीब 35 हजार फंसे छात्रों की घर वापसी को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच कड़वाहट पैदा हो गई है।

बसें भेजना लॉकडाउन का माखौल उड़ाने जैसा
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने योगी सरकार के कोटा बस भेजने के फैसले को लॉकडाउन का माखौल उड़ाना बताया है। उन्होंने राजस्थान सरकार से बसों का परमिट वापस लेने तथा कोटा में ही विद्यार्थियों को सुविधा व सुरक्षा देने की मांग की। नीतीश कुमार कई बार यह कह चुके हैं कि इस तरह से सड़क मार्ग से लोगों के आने-जाने से लॉकडाउन के साथ खिलवाड़ होता है।
मायावती ने योगी सरकार की तारीफ की
वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने योगी सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। मायावती ने कहा कि कोचिंग पढ़ने वाले लगभग 7,500 युवकों को लॉकडाउन से निकालने व उन्हें सुरक्षित घरो में भेजने के लिए यूपी सरकार ने काफी बसें कोटा, राजस्थान भेजी है। यह स्वागत योग्य कदम है। बीएसपी इसकी सराहना भी करती है। मायावती ने आगे ट्वीट में लिखा, ' लेकिन सरकार से यह भी आग्रह है कि वह ऐसी चिंता यहां के उन लाखों गरीब प्रवासी मज़दूर परिवारों के लिए भी ज़रूर दिखाए, जिन्हें अभी तक भी उनके घर से दूर नरकीय जीवन जीने को मजबूर किया जा रहा है।'
बिहार मंत्री ने यूपी सरकार और राजस्थान पर कसा तंज
 बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने यूपी सरकार पर लॉकडाउन की अवहेलना करने का आरोप लगाया। जहां उन्होने साफ़-साफ़ कहा कि योगी आदित्यनाथ और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का ये कदम प्रधानमंत्री के लॉगडॉन के उद्देश्य को पूरी तरह से ध्वस्त कर रहे हैं। यह पूरी तरीक़े से उसका माखौल उड़ाया जा रहा है। चौधरी ने कहा कि अब आप तो जानबूझकर भेदभाव करा रहे हैं। हम अपने प्रदेश के लोगों को सुरक्षित रख रहे हैं। पहले आपका नारा था पधारो ह्मारे देश और आज जब कोरोना की समस्या हुआ तो सबको लेके जाइए।
  तेजस्वी का नीतीश के नाम खुला खत
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार के नाम खुला पत्र लिखा है। पत्र में तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर सवाल उठाए हैं, साथ ही सरकार पर आरोप लगाए हैं कि प्रदेश के बाहर फंसे गरीब मजदूरों और छात्रों को सरकार ने बेसहारा छोड़ दिया है। तेजस्वी ने सवाल किया है कि बिहार सरकार आखिरकार अनिर्णय की स्थिति में क्यों है? प्रवासी मजबूर मजदूर और छात्रों से इतना बेरुखी भरा व्यवहार क्यों? उन्होंने कहा कि छात्र सरकार से लगातार घर वापसी के लिए गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सरकार को उनकी कोई फिक्र नही। आखिर उनके प्रति असंवेदनशीलता क्यों है?
तेजस्वी के बाद प्रशांत किशोर ने नीतीश सरकार पर कसा तंज
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कोरोनावायरस ने बिहार के मुख्यमंत्री पर तंज कसा। उन्होंने ट्वीट में लिखा, ''देश भर में बिहार के लोग फंसे पड़े हैं और नीतीश कुमार जी लॉकडाउन की मर्यादा का पाठ पढ़ा रहे हैं। स्थानीय सरकारें कुछ कर भी रहीं हैं, लेकिन नीतीश जी ने सम्बंधित राज्यों से अब तक कोई बात भी नहीं की है। PM के साथ मीटिंग में भी उन्होंने इसकी चर्चा तक नहीं की।''

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