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मेरी ऑक्सीजन बंद कर दी गई है, मैं मर रहा हूँ, अलविदा”

My oxygen has been turned off, I'm dying, bye dad "

क्या हो जब बेटे को अपने ही मरने का संदेश अपने पिता को वीडियो सेंड करके देना पड़े। उस आखिरी लम्हे को कैमरे में कैद देख पिता अपने बेटे के लिए कुछ न कर सकें। कोरोना के इस दौर ने आज इंसान को वह वक्त दिखाया है जिसकी कल्पना भी आज से पहले किसी ने नहीं की थी। आज साथ रहना डरावना हो गया है। किसी से हाथ मिलाना किसी पाप की तरह है जो कोरोना रूपी इंसान की जान ले रहा है।

इसी बीच इंसानियत को तार-तार कर देने वाली कई खबरे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें से ही एक खबर हैदराबाद से है जहाँ एक बेटे का आखिरी संदेश पाकर जहाँ पिता खुद को कोस रहे है तो वहीं अस्पताल प्रशासन पर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे है। रवि कुमार नामक शख्स ने अपने आखिरी लम्हात को कैमरे में कैद कर पापा से जो कहा वो सुन कोई भी विचलित हो सकता है।

रवि कहते है,
“आपने कहा था कि सरकारी अस्पताल में कोई ख़तरा नहीं होगा और मैंने मना किया था लेकिन इसके बाद भी आपने मुझे अस्पताल में भर्ती करा दिया। आपने मेरी बात नहीं मानी कि डॉक्टर मार डालेंगे। यहाँ कोई नहीं बचेगा। मुझे अब साँस नहीं आ रही है। मेरे बार बार मिन्नतें करने पर भी उन्होंने मेरी ऑक्सीजन बंद कर दी है।”
 “पापा, मुझे ऑक्सीजन नहीं मिल रही है……मैं मर रहा हूँ…… अलविदा पापा…..”

मरते हुए रिकॉर्ड किया गया ये वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया है। 34 वर्षीय रवि कुमार के पिता इर्रगड्डा अस्पताल में काम करने वालों पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने उनके बेटे रवि की ऑक्सीजन रोककर उनकी जान ले ली।  लेकिन अस्पताल प्रशासन इन आरोपों का खंडन करता है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कोरोना वायरस ने सीधे रवि के दिल पर हमला किया था जिसकी वजह से वे उन्हें बचा नहीं सके।

जानकारी के मुताबिक रविवार बीती 24 जून को तेज बुख़ार और साँस लेने में दिक़्क़त होने के बाद इर्रागड्डा जनरल एवं चेस्ट अस्पताल (सरकारी) में भर्ती कराया गया। लेकिन दो दिनों के अंदर ही रवि की मौत हो गई। किसी को नहीं पता था कि वे कोरोना वायरस से संक्रमित थे या नहीं। इससे पहले 23 तारीख़ को रवि के पिता वेंकटस्वारलू रवि का बुख़ार बढ़ने और साँस लेने में दिक़्क़त आने पर उन्हें लेकर एक नज़दीकी अस्पताल में गए थे।

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चूँकि रवि को बुख़ार था, इसलिए अस्पताल वालों ने स्पष्ट रूप से कहा कि ये कोरोना का केस हो सकता है और अगर वे कोरोना टेस्ट रिपोर्ट के साथ आए तो वे उन्हें भर्ती कर सकते हैं। इसके बाद वेंकटस्वारलु दस अस्पतालों में गए लेकिन किसी ने भी रवि का इलाज करने से मना कर दिया।

मृतक के पिता का कहना है कि अस्पताल वाले कोविड टेस्ट की रिपोर्ट माँग रहे थे, इसलिए मैंने कोरोना टेस्ट कराने की कोशिश की। लेकिन ये भी छलावा जैसा ही था। हर टेस्ट सेंटर के बाहर कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीज़ सैकड़ों की संख्या में खड़े थे। जब मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं अपने बेटे का टेस्ट करवा भी पाऊँगा या नहीं, तभी किसी ने मुझे बताया कि मैं प्राइवेट टेस्ट करा सकता हूँ। मैंने ऐसा भी कराया। लेकिन उसकी रिपोर्ट मेरे बेटे की मौत के बाद आई है।”

वीडियो के बारे में बताते हुए उन्होनें कहा “मैं अस्पताल परिसर में ही सो रहा था कि तभी 2 बजे मेरी नींद खुली और मैंने अपना फ़ोन देखा तो मुझे मेरे बेटे का वीडियो मिला जिसमें वह कह रहा था – पापा, मैं मर रहा हूँ। अलविदा…” “ये वीडियो देखते ही मैं उसके वार्ड की ओर भागा लेकिन सबकुछ खत्म हो चुका था। वहीं अस्पताल के सुपरिटेंडेंट महबूब ख़ान कहते हैं, “हमने ऑक्सीजन या वैंटीलेटर नहीं हटाया था। आप स्वयं देख सकते हैं कि उसने नाक के नीचे से ऑक्सीजन पाइप हटा दिया था।”   ख़ान ये भी कहते हैं कि रवि कुमार का भर्ती होने के दो दिनों के अंदर मरना बेहद दुर्भाग्यशाली है।

 

गुलफशा अंसारी 

 

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