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28/01/2020
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पीएम मोदी को शिवाजी की उपाधी, शिवसेना ने बताया चाटुकारिता की हद

Shivaji's title to PM Modi, Shiv Sena told the extent of sycophancy

मुंबई || महाराष्ट्र में सत्तासीन पार्टी शिवसेना एक बार फिर केन्द्र की मोदी सरकार पर हमलावर हो रही है। शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी के नेताजय भगवान गोयल द्वारा लिखी किताब के खिलाफ गुस्सा जाहिर करते हुए इसे चाटुकारिता और पाखंड की उपमा से नवाज़ा। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना छत्रपति शिवाजी से करने वाली किताब को ‘पाखंड और चाटुकारिता’ की हद बताया और जोर देकर कहा कि मोदी कोई ‘भारत के राजा’ नहीं है। इसके साथ ही मुखपत्र सामना के संपादकीय में शिवसेना ने भाजपा नेताओं को छत्रपति शिवाजी पर कुछ किताबें पढ़ने की सलाह दी और कहा कि यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी 17वीं सदी के मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी से तुलना पसंद नहीं आई होगी।

मोदी की तुलना शिवाजी महाराज का अपमान

महाराष्ट्र में किताब को लेकर सरगर्मियां बढ़ती देख भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि महाराष्ट्र में नाराज़गी किताब को लेकर है न कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर। भाजपा नेता जय भगवान की किताब ‘आज का शिवाजी:  नरेन्द्र मोदी’ नामक किताब लिखी है। जिसके बाद महाराष्ट्र का सियासी पारा अधिक गर्म हो गया है। महाराष्ट्र में न सिर्फ  शिवसेना बल्कि राकांपा और कांग्रेस ने किताब की आलोचना की और मोदी की तुलना शिवाजी महाराज से किए जाने को अपमान बताया है। शिवसेना ने अपने संपादकीय में लिखा:-

{शिवसेना ने मुखपत्र सामना में संपादकीय लिखा, गुस्से की लहर मोदीजी के खिलाफ नहीं बल्कि किताब के खिलाफ है, यह अपने आप में ढोंग और चमचागिरी की हद है। शिवसेना ने कहा कि महाराष्ट्र की 11 करोड़ जनता को यह तुलना बिलकुल पसंद नहीं आई। छत्रपति शिवाजी के वंशज एवं भाजपा विधायक शिवेंद्रराजे भोंसले ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया था।}

{संपादकीय में शिवसेना ने साफ किया कि जो लोग मोदी को ‘आज के शिवाजी’ के रूप में संबोधित कर रहे हैं इन्हीं लोगों ने लोकसभा चुनाव के पहले मोदी को विष्णु का तेरहवां अवतार माना था। कल विष्णु के अवतार, आज ‘शिवाजी’। इसमें देश, देव और धर्म का अपमान है ही लेकिन मोदी भी घेरे में हैं। ‘आज के शिवाजी नरेंद्र मोदी’ नामक पुस्तक ढोंग और चमचागिरी का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है। महाराष्ट्र के भाजपा नेताओं को इस ढोंग का खुलकर विरोध करना चाहिए।}

 

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