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पटना ले जाया जाएगा पार्थिव शरीर, 12 जनपथ पर होगा अंतिम दर्शन

The body will be taken to Patna, the last visit will be done at 12 Janpath

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का गुरुवार शाम निधन हो गया। वो 74 साल के थे।  उनके बेटे और सांसद चिराग़ पासवान ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने अपने पिता की तस्वीर के साथ लिखा- ”पापा….अब आप इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन मुझे पता है आप जहां भी हैं हमेशा मेरे साथ हैं। मिस यू पापा।” रामविलास पासवान मोदी सरकार में उपभोक्ता मंत्री थे. लंबे वक़्त से उनकी तबीयत ख़राब चल रही थी और दिल्ली के एस्कॉर्ट्स अस्पताल में भर्ती थे।

रामविलास पासवान के पार्थिव शरीर को आखिरी दर्शन के लिए सुबह 10 बजे उनके आवास 12 जनपथ पर अस्पताल से सीधा लाया जाएगा। दोपहर 2 बजे के बाद उनके पार्थिव शरीर को पटना में लोकजनशक्ति पार्टी के कार्यालय लाया जाएगा। रामविलास पासवान का अंतिम संस्कार शनिवार को पटना में किया जाएगा। रामविलास पासवान को राजनीति का मौसम वैज्ञानिक कहा जाता था । रामविलास पासवान के सोच काही नतीजा था कि बिहार की सबसे छोटी पार्टियों में शामिल होने के बावजूद उनकी हमेशा सत्ता में भागीदारी रहती। ये हिस्सेदारी उन्हें बिहार नहीं ‍बल्कि केंद्र की सत्ता में मिलती। रामविलास पासवान ने साल 2000 में लोक जन शक्ति पार्टी (लोजरा) पार्टी की स्थापना की।

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रामविलास पहले जनता पार्टी से होते हुए जनता दल और उसके बाद जनता दल यूनाइटेड का हिस्सा रहे लेकिन जब बिहार की सियासत में हालात बदल गए तो उन्होनें अपनी पार्टी बना ली। दलितों की राजनीति करने वाले पासवान ने 1981 में दलित सेना संगठन ‍की भी स्थापना की थी । बिहार में दलित समुदाय की दुसाद जाति को लोजपा का कोर वोट बैंक माना जाता है। और इसी जाति के सर्वमान्य नेता राम विलास पासवान माने जाते थे। इन्होनें  1969 में पहली बार अलौली विधानसभा सीट से चुनाव जीता। इसके बाद उन्होनें कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। साल 1977 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले पासवान 9 बार लोकसभा सांसद रहे।
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उनकी मौत की ख़बर आते ही लोगों ने उनको श्रद्धांजलि देना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर ट्वीट कर शोक जताया। उन्होंने लिखा- ”मैं बेहद दुखी हूं, हमारे देश में एक निर्वात पैदा हो गया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। रामविलास पासवान जी का निधन एक व्यक्तिगत नुक़सान है, मैंने एक दोस्त और सहकर्मी खो दिया। वो एक ऐसे शख़्स थे जो हमेशा ये सुनिश्चित करने को उत्सुक रहते थे कि हर ग़रीब एक सम्मानपूर्ण जीवन जी सकें।।’

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