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August 20, 2019
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मराठा प्रभुत्व की हार और मुगल शासक के बाद औपनिवेशिक शासन की शुरूआत

पानीपत में 1526 में हुए पहले युद्ध के बाद 1556 में हुए दूसरे युद्ध के बाद हिंदुस्तान की सरजमीं पर मुगल शासकों का दौर शुरू हो गया था। पानीपत की तीसरी लड़ाई अफगान और मराठों के बीच लड़ी गई थी। यह युद्ध इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि यह भारत में मराठा प्रभुत्व के अंत में चिह्नित था। इस युद्ध के समय में अफगान अहमद शाह अब्दाली नेतृत्व में थे और बाजीराव पेशवा के नेतृत्व में मराठों ने उत्तरी भारत में नियंत्रण स्थापित किया था। बाजीराव पेशवा का नाम सुनते ही पद्मावत का नाम आपके जहन में जरूर आया होगा।

अठारहवीं शताब्दी के दौरान पानीपत की लड़ाई में मराठों की हार ने भारत में औपनिवेशिक शासन की एक नई शुरुआत देखी। युद्ध में मराठों की हार का मुख्य कारण यह था कि पिछले वर्षों के शासनकाल में उनके क्रूर व्यवहार के कारण सहयोगियों ने साथ न देना। बता दें कि सिखों, जाटों, अवध राज्यों, राजपूतों और बहुत से सभी समस्त महत्वपूर्ण शासक, मराठों के व्यवहार से बहुत परेशान थे। पानीपत की तीसरी लड़ाई वर्तमान काल के काला आंव और सनौली रोड के बीच लड़ी गई थी। दोनों सेनाएं लाइनों में चली गईं, लेकिन बौद्धिक रूप से अफगानिस्तान ने मराठा बलों के लिए सभी संभव रेखाओं को काट दिया था।।

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